सेना की बेटियों को ‘जाटव’ और ‘मुस्लिम’ कहकर राजनीति!

साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

जहां पूरा देश ऑपरेशन सिंदूर में वीरांगनाओं के शौर्य पर गर्व कर रहा है, वहीं कुछ नेता ऐसे हैं जो सेना की बेटियों की पहचान धर्म और जाति के चश्मे से करने में जुटे हैं। सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने विंग कमांडर व्योमिका सिंह की जाति बताकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इससे पहले मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर आपत्तिजनक बयान दिया था, जिस पर हाईकोर्ट ने एफआईआर तक के आदेश दिए।

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रामगोपाल यादव की जातिवादी टिप्पणी ने मचाया बवाल

रामगोपाल यादव ने एक सभा में कहा—

व्योमिका सिंह हरियाणा की जाटव हैं और एयर मार्शल भारती यादव हैं… एक को मुसलमान समझकर गाली दी गई, दूसरे को राजपूत समझकर छोड़ा गया।

उनका यह बयान सेना में जाति की चर्चा करने जैसा था — एक ऐसा क्षेत्र जहां धर्म और जाति गौण होते हैं और राष्ट्रधर्म सर्वोपरि

योगी आदित्यनाथ ने दी तीखी प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा:

सेना की वर्दी ‘जातिवादी चश्मे’ से नहीं देखी जाती। हर सैनिक राष्ट्रधर्म निभाता है, न कि किसी मजहब या जाति का प्रतिनिधि होता है।

योगी ने इसे तुष्टिकरण की राजनीति बताते हुए सपा की “संकुचित मानसिकता” करार दिया।

विजय शाह की टिप्पणी पर कोर्ट का डंडा

इससे पहले मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर एक आपत्तिजनक धार्मिक टिप्पणी कर दी थी। इसके बाद जब हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल हुई तो कोर्ट ने तत्काल एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। दबाव बढ़ने पर शाह ने माफी मांगी, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था।

सेना – ना जाति देखती है, ना धर्म

सेना में जब कोई कर्नल, कमांडर या एयर मार्शल बनता है, तब उसकी योग्यता, देशभक्ति और समर्पण देखे जाते हैं – न कि उसका उपनाम, धर्म या जातीय पहचान। नेताओं द्वारा वीर सैनिकों को जातिगत खांचों में बांटना न केवल उनकी शौर्यगाथा का अपमान है, बल्कि इससे जवानों का मनोबल भी टूटता है।

राजनीतिक लाभ के लिए सेना का इस्तेमाल खतरनाक संकेत

रामगोपाल यादव और विजय शाह जैसे नेताओं की टिप्पणियां इस बात का प्रतीक हैं कि राजनीति अब सैनिकों के खून-पसीने की कीमत पर भी वोट बटोरने से नहीं चूकती। परंतु देश की जनता अब पहले से ज्यादा सजग है — और सेना का अपमान सहन नहीं करेगी।

राजनीतिक मोहरा बनाना बंद करें

जो महिलाएं हवाई सीमा पार कर दुश्मनों को ढेर करती हैं और जो मेडल नहीं, मातृभूमि के लिए मरने की कसम खाती हैं, उन्हें जाति और मजहब से बांटना राष्ट्रघात के बराबर है।

अब वक्त है जब देश एक स्वर में कहे:

“सेना का अपमान नहीं सहेंगे!”

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